भगवान श्रीराम की 12 कलाएं मुख्य रूप से मानवीय मर्यादा, धर्म और आदर्श शासन से जुड़ी हैं।
चंद्रमा और सूर्य की कलाओं का अवतारों से सीधा संबंध उनके वंश के आधार पर तय होता है। भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे और भगवान श्रीकृष्ण चंद्रवंशी थे।
श्रीराम की 12 कलाएं कौन सी हैं?
शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, प्रभु श्रीराम की 12 कलाएं उनके उत्तम चरित्र के गुणों को दर्शाती हैं:
प्रथमा (दृढ़ता): विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म और मार्ग पर अडिग रहना।
धैर्य: वनवास, युद्ध और संकट के समय भी मन को शांत रखना।
करुणा (दया): शत्रु (जैसे मरते समय रावण) और पशु-पक्षियों (जटायु, सुग्रीव) पर भी दया करना।
न्यायप्रियता: राजा के रूप में हमेशा निष्पक्ष और सही न्याय करना।
सत्यधर्म: प्राण जाए पर वचन न जाए, सत्य का हमेशा पालन करना।
शौर्य (साहस): महाबली राक्षसों और रावण की विशाल सेना से बिना डरे युद्ध करना।
मर्यादा: समाज और परिवार के नियमों व दायित्वों को पूरी तरह निभाना।
अनासक्ति: राजपाठ और महलों के सुख को एक पल में छोड़कर वन चले जाना।
प्रजापालन: अपनी प्रजा के सुख को अपना परम धर्म मानना (रामराज्य)।
विवेक: सही और गलत का हमेशा गहरा ज्ञान रखना।
तेज: ऐसा दिव्य व्यक्तित्व जिसे देखकर दुष्ट भी थर-थर कांपें और भक्त सम्मोहित हो जाएं।
शरणरक्षक: जो भी शरण में आए (जैसे विभीषण), उसे अभय दान देना।
आगे हम सूर्य देव और चन्द्र देवकी कलाओं पर चर्चा करेंगे।
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