'कला' शब्द सुनते ही हमारे मन में चित्रकारी, संगीत या नृत्य की छवि उभरती है, लेकिन इसका दायरा सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। कला मानव मन की सुंदर अभिव्यक्ति है जो जीवन को जीने योग्य और सुसंस्कृत बनाती है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों से लेकर आधुनिक युग तक, कला की परिभाषा और इसके रूपों में गहरा बदलाव आया है। आइए, इस लेख में जानते हैं कि कला का वास्तविक अर्थ क्या है और यह हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करती है।
कला (Art) वह सुंदर रचना है जिसे इंसान अपनी सोच और कल्पना से बनाता है। कला को रचने वाले इंसान को कलाकार (Artist) कहते हैं, और उनके द्वारा बनाई गई सुंदर रचना को कलाकृति (Artwork) कहते हैं।
- चित्रकला: रंगों और कागज़ या कपड़े पर बनाई गई सुंदर तस्वीर।
- मूर्तिकला: पत्थर, मिट्टी या धातु को तराश कर बनाई गई मूर्ति।
- हस्तकला: हाथ से बनाई गई पारंपरिक और उपयोगी वस्तुएं।
- यह मन के भावों को दुनिया के सामने रखती है।
- यह हमारी पुरानी संस्कृति और इतिहास को ज़िंदा रखती है।
- यह समाज को जोड़ने और नया संदेश देने का काम करती है।
‘कला’ शब्द —
संस्कृत में 'कला' शब्द की उत्पत्ति 'कल्' धातु से मानी जाती है, जिसका अर्थ है—'प्रेरित करना', 'शब्द करना' या 'गणना करना'। फाई
'कला' का धर्म सम्मत अर्थ भगवान की दिव्य शक्तियों, चेतना के स्तर और गुणों से है। भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों में उनकी कलाओं की अभिव्यक्ति उनके अवतरण के उद्देश्य पर निर्भर करती थी। शास्त्रों में संपूर्ण 16 कला का वर्णन है।भगवान श्रीकृष्ण एकमात्र ऐसे अवतार हैं जो सभी 16 कलाओं से पूर्ण थे, इसलिए उन्हें 'पूर्णावतार' कहा जाता है।
ऐहिक दृष्टि से भारतीय ग्रंथोंमें वर्णित 64 कलाएं मनुष्य के सर्वांगीण विकास, सुखी, और आदर्श सांसारिक जीवन का आधार हैं, जीवन को सुगम, संस्कारित और कुशल बनाने वाले व्यावहारिक कौशल हैं।
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