पौराणिक और धार्मिक दृष्टिकोण भारतीय ग्रंथों में कला: पौराणिक और धार्मिक दृष्टिकोण[2]

 योगेश्वर श्री कृष्ण 


(सोलह कलाओंसे मण्डित)

अब हम अवतारों की कालाओं के आध्यात्मिक धर्म सम्मत जानकारी पर आते है—

अवतारों में कलाओंका विवरण 

विभिन्न ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार मुख्य अवतारों में कलाओं की संख्या इस प्रकार है:

 
अवतार का नाम  
 औरमहत्त्व / विशेषता
मत्स्य, कूर्म, वराह1 से 2 कला (कुछ कथाओं में 10-11 आवेश कलाएं)मुख्य रूप से संकट से रक्षा और जीव चेतना की शुरुआत के लिए।
नरसिंह अवतार1 से 3 कला (विशिष्ट परिस्थिति हेतु)केवल हिरण्यकश्यप के वध और प्रहलाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए।
वामन अवतार2 से 3 कलाराजा बलि के अहंकार को तोड़ने के लिए ब्राह्मण रूप।
परशुराम अवतार3 से 5 कलादुष्ट क्षत्रियों के संहार के लिए आवेश रूप।
राम अवतार12 कलामर्यादा पुरुषोत्तम रूप। मानव सीमाओं में रहकर आदर्श जीवन जीना था।
कृष्ण अवतार16 कला (पूर्णावतार)चंद्रवंशी रूप। इसमें ईश्वर की सभी शक्तियां और लीलाएं समाहित थीं।
बुद्ध अवतार5 से 8 कलासमाज को शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाने के लिए।
कल्कि अवतार4 से 8 कलाकलयुग के अंत में केवल पापियों के संहार के उद्देश्य से प्रकट होंगे।

 ध्यातव्य: सामान्य मनुष्यों में केवल 5 से 6 कलाएं ही सक्रिय होती हैं, जबकि महान संतों में यह 7 से 8 कलाओं तक हो सकती हैं। आठ से अधिक कलाओं का तेज केवल दिव्य देह ही संभाल सकती है. 

 


 श्रीकृष्ण में मौजूद 16 मुख्य दिव्य गुण (कलाएं) इस प्रकार हैं: 

1.दया: हर जीव के प्रति करुणा रखना।

2.धैर्य: कठिन समय में भी विचलित न होना।

3.क्षमा: शत्रु या गलती करने वाले को माफ करना।

4.न्याय: हमेशा धर्म और न्याय का साथ देना।

5.निरपेक्षता (निष्पक्षता): बिना किसी भेदभाव के काम करना।

6.निरासक्ति: सुख-दुख और मोह से दूर रहना।

7.तपस्या: परम आत्मिक और आध्यात्मिक शक्ति होना।

8.अपराजेय: कोई भी शक्ति परास्त न कर सके।

9.दानशीलता: सब कुछ दान करने की क्षमता (जैसे सुदामा को तीन लोक दिए)।

10.सौंदर्यमय: रूप और व्यवहार से सबको मोहित करना।

11.नृत्यकला: नृत्य और उत्सवों के ज्ञाता (रासलीला)।

12.संगीतज्ञ: बांसुरी की धुन से पूरी सृष्टि को आनंदित करना।

13.नीतिवादी: कूटनीति और सही मार्ग का ज्ञान (महाभारत में मार्गदर्शन)।

14.सत्यवादी: हमेशा सत्य के मार्ग पर अडिग रहना।

15.सर्वज्ञता: भूत, भविष्य और वर्तमान की सब बातें जानना।

16.सर्वनियंता: पूरी सृष्टि को नियंत्रित करने की असीम क्षमता। 

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