आज इसी बहाने कुछ ज्ञान वृद्धि कर ली जाए।
क्या आप को ज्ञात है कि सप्त ऋषि मंडल के परम पूज्य ऋषिगण भी परमानेंट नहीं हैं?
जी हां यही सच है।
—हमें आज ऋषि पञ्चमी के बहाने कुछ जान लेना चाहिए—
धर्म प्रतिपादक हमारे ग्रंथों और ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार, प्रत्येक मन्वंतर में सप्तर्षि (सात महान ऋषि) अलग-अलग होते हैं। समय के चक्र में एक मन्वंतर पूरा होने पर अगले मन्वंतर में नए सप्तर्षियों की नियुक्ति होती है जो धर्म– ज्ञान को पुष्ट करते हैं।
वर्तमान (वैवस्वत) मन्वंतर के सप्तर्षि
हम इस समय सातवें मन्वंतर यानी वैवस्वत मन्वंतर में जी रहे हैं। इस काल के प्रमुख सप्तर्षि निम्नलिखित हैं:
१• वशिष्ठ
२•कश्यप
३•अत्रि
४•जमदग्नि
५•गौतम
६•विश्वामित्र
७•भारद्वाज
प्रथम (स्वयंभुव) मन्वंतर के सप्तर्षि
पहले मन्वंतर यानी स्वयंभुव मन्वंतर के दौरान सप्तर्षि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे:
१•मरीचि
२•अत्रि
३•अंगिरा
४•पुलस्त्य
५•पुलह
६•क्रतु
७•वशिष्ठ
आने वाले आठवें मन्वंतर (सावर्णि मन्वंतर) के सप्तर्षि
निम्नलिखित होंगे:
१•गालव
२•दीप्तिमान
३•परशुराम
४•अश्वत्थामा
५•कृपाचार्य (कृप)
६•ऋष्यश्रृंग
७•वेदव्यास
